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कविता से साधुता सीखनी हो तो स्पेनिश कवयित्री नॉर्मा गोंजालेज की कविता से सीखी जा सकती है।
गोंजालेज की कविता, ज़ाहिर है, अपने आसपास रह रहे लोगों को, रह रहे पेड़ों को, रह रहे पंछियों को, रह रहे दरियाओं को मृत्यु के निकट न ले जाकर जीवन के निकट ले जाती है।
यानी नॉर्मा गोंजालेज की कविता मृत्यु की आहट की कविता न होकर जीवन की आहट की कविता है। और जीवन की ऐसी आहट वाली कविता की दरकार मनुष्य-समाज को हमेशा रहती आई है।
- डॉ. शहंशाह आलम
कवि, आलोचक, संपादक